
झीलों की खूबसूरती और साफ-सफाई के लिए मशहूर उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन धरातल पर तस्वीरें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। शहर के मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी इलाकों तक, शायद ही कोई ऐसी जगह बची हो जहाँ कचरे के ढेर ने अपना ठिकाना न बनाया हो। उदयपुर की सड़कों पर बिखरा यह कूड़ा न केवल शहर की सुंदरता को दागदार कर रहा है, बल्कि स्वच्छता अभियान के उन दावों की भी पोल खोल रहा है, जिन पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपए खर्च करता है। नगर निगम का दावा है कि शहर के हर वार्ड में कचरा संग्रहण की गाड़ियां समय पर पहुंचती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इन गाड़ियों के चलने के बावजूद जगह-जगह कचरे के पॉइंट बन गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कचरा संग्रहण की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई बार गाड़ियां मोहल्लों में नहीं पहुंचती, जिसकी वजह से लोग मजबूरन सड़कों के किनारे कचरा फेंक रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ कागजों पर सफाई दिखाने से शहर स्मार्ट नहीं बनेगा। यदि समय रहते कचरा प्रबंधन की इस व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, तो उदयपुर की साख पर लगा यह गंदगी का दाग और गहरा होता जाएगा। स्मार्ट सिटी के मानकों पर खरा उतरने की कोशिश में जुटे प्रशासन के पास फिलहाल इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन इस बदहाली पर कब जागता है।
01 May 2026