
उदयपुर में टाउन हॉल से शुरू हुई रैली जिला कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां किसान, मजदूर और वामदलों से जुड़े विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। भारत छोड़ो आंदोलन दिवस पर देशव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत हुए इस प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में लाल झंडे, तिरंगे, बैनर और जेल भरो आंदोलन के पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी देने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। सड़क पर बैठकर नारेबाजी कर रही महिलाओं और बुजुर्ग कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस वाहनों में बैठने के बाद भी कार्यकर्ताओं ने लाल झंडे और तिरंगे लहराते हुए नारेबाजी जारी रखी। प्रदर्शन में इंटक, सीटू, अखिल भारतीय किसान सभा और संयुक्त किसान मोर्चा सहित कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चार श्रम संहिताओं को रद्द कर श्रम कानून लागू करने, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने और किसानों से जुड़े समझौतों को रद्द करने की मांग उठाई। वामदल से जुड़े राजेश सिंघवी ने कहा कि यह आंदोलन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार पर मजदूरों और किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। साथ ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने से वाहनों को नुकसान होने का दावा करते हुए इस नीति पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने उदयपुर की कच्ची बस्तियों के लोगों को पट्टे देने, माछला मगरा, देवाली और भीलू राणा बस्ती के निवासियों की समस्या दूर करने, ऑनलाइन चालान की कार्रवाई पर रोक लगाने और ठेला-फुटपाथ व्यवसायियों के रोजगार की सुरक्षा की मांग भी उठाई। राजेश सिंघवी ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा।
10 Aug 2026