
कानून के रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं और नियमों की धज्जियाँ उड़ाने लगें, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? उदयपुर के भूपालपुरा थाने में तैनात खाकीधारियों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने मारपीट के एक मामले में शुक्रवार शाम एक युवक के साथ उसके 16 वर्षीय साथी को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पहली और सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि उन्होंने आरोपी का आधार कार्ड चेक करने की जहमत तक नहीं उठाई और अपनी रिपोर्ट में उसे 18 साल का बालिग बात दिया। इतना ही नहीं, पीड़ित किशोर और उसके वकीलों का आरोप है कि पुलिस ने उसे 24 घंटे तक थाने के लॉकअप में बंद रखा। इस दौरान उसके साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उससे जबरन थाने के टॉयलेट तक साफ करवाए गए। शनिवार शाम जब पुलिस उसे बालिग बताकर तहसीलदार जब्बरसिंह चारण की कोर्ट में पेश करने पहुँची, तो वहां मौजूद वकील वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने युवक की उम्र पर आपत्ति जताई। जैसे ही उसका आधार कार्ड मंगवाया गया, पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई। दस्तावेज में उसकी उम्र महज 16 साल 6 महीने निकली। तहसीलदार जब्बरसिंह चारण भी पुलिस की इस कार्यप्रणाली को देख हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत पेशी लेने से इनकार कर दिया। कलेक्ट्री परिसर में करीब दो घंटे तक वकीलों और पुलिस के बीच तीखी बहस और हंगामा चलता रहा। नियमानुसार नाबालिग को गिरफ्तार नहीं बल्कि डिटेन किया जाता है और उसे किशोर न्याय बोर्ड में पेश करना अनिवार्य है, लेकिन भूपालपुरा पुलिस नियमों को दरकिनार कर उसे कलेक्ट्री ले आई। जब इस पूरे प्रकरण पर थानाधिकारी आदर्श कुमार परिहार से सवाल किया गया, तो वे कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। उनका तर्क था कि परिजनों ने उम्र 18 साल बताई थी, जबकि कानूनन पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह आयु का दस्तावेजी सत्यापन करे। इस मामले को जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। एसपी ने साफ कहा है कि इस मामले की गहन जांच करवाई जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी खामी किसके स्तर पर हुई। पुलिस कप्तान ने थानाधिकारी आदर्श कुमार से रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वही पिडित ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस वालों ने उसे यह भी धमकी दी कि 6 महिने बाद उसे फिर से थाने में बंद करेंगे। और उस पर यह भी दबाव बनाया गया कि वो कोर्ट में यह बोल दे की उसकी उम्र 18 साल है। फिलहाल पीड़ित किशोर को सोमवार को जेजे बोर्ड में पेश किया गया है, लेकिन इस घटना ने उदयपुर पुलिस की छवि पर गहरा दाग लगा दिया है।