
मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार से जुड़े संपत्ति विवाद ने अब कानूनी के साथ-साथ भावनात्मक मोड़ भी ले लिया है। दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की अंतिम वसीयत को लेकर उनकी दोनों बेटियां पद्मजा कुमारी और भार्गवी कुमारी ने मुंबई हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी है। कोर्ट में पेश दस्तावेजों में दोनों बहनों ने दावा किया है कि उनके पिता शराब पीने के आदी थे और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं थे, ऐसे में वह वसीयत जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम नहीं थे। बेटियों के इन दावों पर भाई डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि संपत्ति के लालच में उनकी बहनों ने अपने ही पिता की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। लक्ष्यराज सिंह का कहना है कि उनके पिता मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ थे और अंतिम समय तक अपने फैसले स्वयं लेते रहे। उन्होंने इसे परिवार और परंपराओं के खिलाफ बताया। डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2024 में दोनों बहनों ने कुछ कंपनियों के शेयर पिता को गिफ्ट किए थे, जिन्हें अरविंद सिंह मेवाड़ ने स्वयं स्वीकार किया और गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर भी किए। इसके अलावा, जनवरी 2025 में बहनों ने पिता के कहने पर कुछ कंपनियों के निदेशक पद से इस्तीफा भी दिया था, जो उनके मानसिक रूप से सक्षम होने की ओर इशारा करता है। गौरतलब है कि अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन 16 मार्च 2025 को हुआ था। इससे पहले 7 फरवरी 2025 को उन्होंने वसीयत तैयार करवाई थी, जिसमें संपत्तियों का एकमात्र उत्तराधिकारी बेटे लक्ष्यराज सिंह को बनाया गया था। बेटियों ने पिता की स्व-अर्जित संपत्तियों में हिस्सा मांगा है, जिनमें उदयपुर की शिकारबाड़ी भूमि और मुंबई की कई संपत्तियां शामिल हैं। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित हो चुका है, जहां 12 जनवरी 2026 को सभी पक्षकारों की उपस्थिति में सुनवाई होगी।