
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उदयपुर के गांधी ग्राउंड में आयोजित होने वाले हल्दीघाटी सार्ध चतुशती समारोह को लेकर तैयारियों का अंतिम चरण पूरा कर लिया गया है और पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। राजस्थान के इतिहास में महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी युद्ध का विशेष महत्व रहा है। इसी ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आयोजित इस समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर आयोजन समिति और प्रशासन की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। बारिश की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजन स्थल पर तीन विशाल वाटरप्रूफ डोम तैयार किए गए हैं। पूरे पंडाल में करीब 20 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। दर्शकों की सुविधा के लिए अलग-अलग ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक ब्लॉक में एक हजार कुर्सियां लगाई गई हैं। साथ ही आवागमन और आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त खुला स्थान भी छोड़ा गया है। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण मिट्टी से तैयार किए गए तीन भव्य ऐतिहासिक मॉडल हैं। इनमें कुंभलगढ़ दुर्ग, चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक विजय स्तंभ और हल्दीघाटी युद्ध के जीवंत दृश्य शामिल हैं। विशेष रूप से तैयार किए गए हल्दीघाटी मॉडल में महाराणा प्रताप अपने प्रिय घोडे चेतक पर सवार होकर शत्रुओं का सामना करते हुए दिखाई दे रहे हैं। आयोजन के लिए मंच को भी दो हिस्सों में विभाजित किया गया है। मुख्य मंच पर संतों का आसन रहेगा, जबकि दूसरे मंच पर समाज के प्रमुख और गणमान्य अतिथि के बैठने की व्यवस्था की गयी है। आयोजन समिति के सदस्य और अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं, ताकि महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह ऐतिहासिक, भव्य और यादगार बन सके।