
उदयपुर जिले के ओगणा थाना क्षेत्र में हुई इस घटना ने रिश्तों की परिभाषा बदल कर रख दी है। करीब एक दशक पहले एक पिता ने अपनी लाड़ली की धूमधाम से शादी की थी। गृहस्थी हंसी-खुशी चल रही थी और आंगन में तीन मासूमों की किलकारियां गूंज रही थीं। लेकिन दो महीने पहले अचानक सब कुछ बिखर गया। तीन बच्चों की मां अपने पति और दो से साढ़े पांच साल तक के मासूम बच्चों को बिलखता छोड़ गांव के ही एक शख्स के साथ फरार हो गई। जब पुलिस ने महिला को दस्तयाब कर परिजनों के सामने पेश किया, तो उम्मीद थी कि ममता जाग उठेगी, लेकिन जो हुआ उसने सबको सुन्न कर दिया। महिला ने न केवल अपने बूढ़े माता-पिता बल्कि अपने ही तीन कलेजे के टुकड़ों को पहचानने तक से इनकार कर दिया। समाज और पुलिस की घंटों चली समझाइश भी नाकाम रही और वह अपने प्रेमी के साथ रहने के फैसले पर अडिग रही। बेटी के इस बर्ताव ने पिता के आत्मसम्मान और विश्वास को इस कदर चोट पहुंचाई कि उन्होंने उसे अपने जीवन से पूरी तरह मिटाने का फैसला कर लिया। पिता ने बाकायदा शोक पत्रिका छपवाई, जिसमें 6 जनवरी को बेटी का निधन बताया गया। इतना ही नहीं, 13 और 14 जनवरी को गांव में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गौरणी-धूप और मृत्युभोज का आयोजन किया गया। सैकड़ों रिश्तेदारों और समाज के लोगों की मौजूदगी में पिता ने घोषणा की कि जो बेटी अपने बच्चों की नहीं हो सकी, वह उनकी भी नहीं है। उन्होंने अपनी बेटी को वसीयत और संपत्ति से भी बेदखल कर दिया है। आज उस घर में मातम जैसा सन्नाटा है, जहां तीन मासूम बच्चे अपनी मां की राह देख रहे हैं, जबकि समाज इस कठोर लेकिन लाचार पिता के फैसले को मूकदर्शक बनकर देख रहा है।

17 Jan 2026