
उदयपुर शहर के समीप स्थित लकड़वास गांव बुधवार को एक बेहद भावुक दृश्य का गवाह बना। यहां चार बेटियों ने अपनी मां के प्रति प्रेम, सम्मान और संस्कारों की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। 55 वर्षीय जुली जोशी का कुछ समय से बीमारी के चलते इलाज चल रहा था। 19 मई को एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। संयोग यह रहा कि जिस दिन उनका जन्मदिन था, उसी दिन गांव में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। जुली जोशी की अंतिम इच्छा थी कि उनके निधन के बाद अंतिम संस्कार की सभी जिम्मेदारियां उनकी बेटियां ही निभाएं। क्योकि परिवार में कोई बेटा नहीं था, इसलिए बेटियों मीनाक्षी, कोमल, चेतना और रवीना ने मां की इस आखिरी इच्छा को अपना सबसे बड़ा कर्तव्य मानते हुए पूरा किया। चारों बेटियों ने नम आंखों के साथ अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट तक अंतिम यात्रा में साथ रहीं। अंतिम संस्कार के दौरान बेटियों ने स्वयं मुखाग्नि देकर मां को अंतिम विदाई दी। इस दौरान वहां मौजूद ग्रामीण और परिजन भी भावुक हो उठे। जब बेटियां अपनी मां की अर्थी लेकर गांव की गलियों से गुजर रही थीं, तब हर किसी की नजरें उसी ओर टिकी थीं। लोगों ने इस दृश्य को बदलते समाज और मजबूत पारिवारिक संस्कारों की मिसाल बताया। ग्रामीणों और मौजूद लोगों ने बेटियों के इस साहसिक कदम की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां आज हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता के प्रति सच्चा सम्मान और सेवा किसी बेटे-बेटी में फर्क नहीं करती। लकड़वास गांव की यह घटना समाज को एक सकारात्मक संदेश देती नजर आई, जहां बेटियों ने परंपराओं से आगे बढ़कर मां के प्रति अपने प्रेम और जिम्मेदारी को पूरी श्रद्धा के साथ निभाया।
22 May 2026