
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ज़िल हिज्जा महीने की 18वीं तारीख को मनाई जाने वाली ईद-ए-ग़दीर शिया समुदाय के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक मानी जाती है। यह दिन उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है जब पैगंबर हज़रत मुहम्मद ने ग़दीर-ए-ख़ुम के स्थान पर हज़रत अली को अपना उत्तराधिकारी और पहला इमाम घोषित किया था। इसी अवसर पर उदयपुर की शिया जामा मस्जिद में विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर इस पर्व की अहमियत को याद किया। मस्जिद में धार्मिक वातावरण के बीच इबादत और दुआओं का सिलसिला चला, वहीं उपस्थित लोगों ने हज़रत अली की शिक्षाओं और उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प भी दोहराया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मौलाना फ़िरोज़ मिर्ज़ा रहे, जिन्होंने अपनी तक़रीर में ईद-ए-ग़दीर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सत्य, न्याय, नेतृत्व और इंसानियत के मूल्यों को अपनाने का संदेश भी देता है। उन्होंने हज़रत अली के व्यक्तित्व, उनके ज्ञान, साहस और समाज के प्रति समर्पण को मानवता के लि