
यूजीसी द्वारा जनवरी 2026 में लागू किए गए नए कानून Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulation 2026 के विरोध में उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में विप्र फाउंडेशन, सर्व ब्राह्मण समाज और सवर्ण संगठनों के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग उठाई।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस अधिसूचना के तहत सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में 90 दिनों के भीतर इक्विटी कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है, जिन्हें शिकायतों की जांच के व्यापक अधिकार दिए गए हैं। समाज के लोगों का आरोप है कि यह कानून सामाजिक समरसता को कमजोर करेगा। विप्र फाउंडेशन जोन वन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल ने कहा कि यह कानून भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की भावना के अनुरूप नहीं है और समान अवसर के सिद्धांत को कमजोर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून सनातन धर्म की एकता को खंडित करने वाला है और समाज में टकराव की स्थिति पैदा करेगा। पालीवाल ने यह भी कहा कि इस कानून के माध्यम से एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग के छात्रों को सवर्ण समाज के छात्रों के खिलाफ झूठी शिकायत करने का अवसर मिलेगा, जिससे विश्वविद्यालयों का सामाजिक संतुलन बिगड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो देशभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष निर्णय की मांग की गई।