
जोधपुर हाईकोर्ट का फैसला फिल्म निर्माण के नाम पर 30 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के हाईप्रोफाइल मामले में बॉलीवुड फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ से बड़ा झटका लगा है। आपराधिक (क्रिमिनल) केस को दीवानी (सिविल) विवाद बताकर हाईकोर्ट के 19 मार्च 2026 के अंतिम आदेश में संशोधन कराने और केस को सिविल रंग देने की उनकी कानूनी पैंतरेबाजी पूरी तरह नाकाम हो गई हैं। न्यायमूर्ति फर्जंद अली की एकल पीठ ने 14 अगस्त 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी श्वेतांबरी की संशोधन याचिका खारिज करते हुए साफ किया कि एक बार अंतिम फैसला सुनाने के बाद अदालत अधिकार-शून्य हो जाती है और अपने निर्णय की समीक्षा नहीं कर सकती। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 403 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि हस्ताक्षरित फैसले में कोई बदलाव संभव नहीं है। पुलिस जांच पूरी कर ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट पेश कर चुकी है और मामला अब आपराधिक धाराओं में आरोप तय करने के चरण में है। हाईकोर्ट ने साफ रुख कर दिया है कि यह मामला आपराधिक (क्रिमिनल) केस श्रेणी में ही चलेगा। इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय उदयपुर में चल रही है। गत 7 दिसंबर 2025 को उदयपुर के तत्कालीन डीएसपी छगनलाल राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने मुंबई के जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स में दबिश दी थी। गार्ड्स के गुमराह करने के बावजूद पुलिस ने विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी को गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्डिया की पक्षकार बनने की अर्जी को भी कोर्ट ने याचिका निस्तारित होने के कारण निष्फल मानकर खारिज कर दिया, हालांकि उनके कानूनी अधिकार सुरक्षित रखे हैं। इस मामले के दलाल दिनेश कटारिया की गिरफ्तारी पर फिलहाल हाईकोर्ट से रोक लगी हुई है। भट्ट दंपती सुप्रीम कोर्ट की जमानत पर जेल से बाहर हैं। -क्रिमिनल केस का मजबूत आधार- फर्जी बिलों का खेल और ₹44.29 करोड़ का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पुलिस पूछताछ में सह-निर्माता महबूब अंसारी और वेंडर संदीप त्रिलोभन ने कबूला कि आरोपियों ने रंग-रोगन करने वालों, ऑटो चालकों और छोटे दुकानदारों के नाम पर फर्जी वेंडर खाते खुलवाए थे। इन खातों में फर्जी बिलों के जरिए ₹2-2 लाख जमा कराए जाते, जिसमें से ₹1.40 लाख सीधे श्वेतांबरी भट्ट के बैंक खाते में ट्रांसफर होते थे। इंदिरा एंटरटेनमेंट से 25 से ज्यादा बार फर्जी बिल क्लेम कराकर ऑन-रिकॉर्ड ₹35 लाख का अवैध भुगतान पकड़ा जा चुका है। पुलिस ने इन सबके साक्ष्य भी जुटा लिए। पीड़ित डॉ. अजय मुर्डिया से 4 फिल्मों के नाम पर ₹44.29 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान लिया गया। इसमें से चौथी फिल्म महाराणा (परिवर्तित नाम रण) का करार ₹25 करोड़ में हुआ, लेकिन शूटिंग तक शुरू नहीं हुई। फर्जी बिलों के पुख्ता सबूतों और करोड़ों के डायरेक्ट ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ने ही इस मामले को पूरी तरह आपराधिक (क्रिमिनल) श्रेणी में खड़ा किया है। -ठगी और फर्जीवाड़े के आरोपी भट्ट परिवार पर 7 साल की जेल की तलवार डॉ. अजय मुर्डिया द्वारा 8 नवंबर 2025 को भूपालपुरा थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर पुलिस ने विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट समेत 8 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की बेहद संगीन और गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें बीएनएस की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), 316(2) (आपराधिक विश्वासघात), 336(3) (फर्जी बिल व दस्तावेज बनाना), 340(2) (जाली कागजातों का असली रूप में उपयोग) और 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) शामिल हैं। इन धाराओं में दोषियों को 7 साल तक के कठोर कारावास के साथ भारी जुर्माने से दंडित करने का कड़ा कानूनी प्रावधान है। 26 मार्च 2024 को पत्नी की पुण्यतिथि पर मिडलमैन दिनेश कटारिया से मुलाकात से शुरू हुआ यह घटनाक्रम 30 करोड़ से अधिक की ठगी के बाद अब अदालत में आपराधिक मुकदमे की दहलीज पर पहुंच चुका है।

18 Aug 2026