
आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य कितनी तेजी और समन्वय के साथ किया जा सकता है, इसे परखने के उद्देश्य से उदयपुर की चीरवा टनल में विशेष मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास के तहत ऐसा परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें टनल के भीतर अचानक पहाड़ का हिस्सा ढहने से कई लोगों के मलबे में फंसने की सूचना दी गई। अलर्ट मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, पुलिस, चिकित्सा विभाग और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें निर्धारित योजना के अनुसार मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू टीमों ने आधुनिक उपकरणों की सहायता से टनल के भीतर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। इसके बाद चिकित्सा विभाग की टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया और एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। मॉक ड्रिल के दौरान स्थानीय पुलिस ने यातायात व्यवस्था संभाली, जबकि विभिन्न एजेंसियों के बीच संचार व्यवस्था, आपसी समन्वय और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का भी परीक्षण किया गया। सीमित समय में पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा कर टीमों ने त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का प्रदर्शन किया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के नियमित अभ्यास का उद्देश्य हाईवे टनल में भूस्खलन, पहाड़ गिरने या सड़क दुर्घटना जैसी आपदाओं के दौरान रिस्पॉन्स टाइम कम करना और राहत कार्य को अधिक प्रभावी बनाना है। साथ ही सभी विभागों की जिम्मेदारियों और कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की जाती है, ताकि किसी वास्तविक आपदा की स्थिति में बिना किसी भ्रम के तुरंत और समन्वित कार्रवाई कर आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
22 Jul 2026