
क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट के बीच डीजल के खुदरा और बल्क रेट में बड़ा अंतर चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा है कि तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में सस्ता हुए कच्चे तेल का लाभ आम उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंचा रही हैं, जबकि बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को कम दरों पर डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। उदयपुर में रिटेल पेट्रोल पंपों पर डीजल का औसत भाव 98 रुपये 52 पैसे प्रति लीटर बताया जा रहा है, जबकि बड़ी फैक्ट्रियों के निजी कंज्यूमर पंपों पर यही डीजल करीब 94 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध है। यानी आम उपभोक्ता को प्रति लीटर करीब साढ़े चार रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में ब्रेंट क्रूड 75 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहा। वर्ष 2026 में फरवरी के दौरान यह 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, अप्रैल और मई में 110 डॉलर के आसपास बना रहा और जून में घटकर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। इसके बाद कीमतें 70 से 71 डॉलर प्रति बैरल तक आने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जब क्रूड रिकॉर्ड स्तर पर था, तब तेल कंपनियों ने बल्क उपभोक्ताओं के लिए डीजल का रेट बढ़ाकर करीब 138 रुपये प्रति लीटर कर दिया था। वहीं अब क्रूड सस्ता होने के बाद उद्योगों के लिए यही दर घटाकर 94 रुपये प्रति लीटर कर दी गई, लेकिन आम उपभोक्ताओं के लिए खुदरा कीमत लगभग 98 रुपये 52 पैसे प्रति लीटर बनी हुई है। प्रदेश में प्रतिदिन करीब 1.85 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती है। इनमें उदयपुर संभाग की हिस्सेदारी करीब 25 लाख लीटर प्रतिदिन बताई गई है। प्रति लीटर करीब साढ़े चार रुपये के अंतर के आधार पर दावा किया जा रहा है कि इस मूल्य अंतर से उदयपुर संभाग के उपभोक्ताओं पर प्रतिदिन लगभग 1.12 करोड़ रुपये और पूरे राजस्थान में करीब 8.32 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। यही वजह है कि ट्रांसपोर्टर्स, किसान और मध्यम वर्ग इस मूल्य निर्धारण नीति पर सवाल उठा रहे हैं।