
महाकालेश्वर मंदिर की भूमि को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच सोमवार को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और वैज्ञानिक पद्धति से जमीन की पैमाइश शुरू की। सरकारी वकील अशोक सिंघवी ने बताया कि सिविल न्यायालय शहर उत्तर में महाकालेश्वर मंदिर की भूमि को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में साबीक आराजी संख्या 5 और वर्तमान आराजी संख्या 42 की भूमि पर कथित अतिक्रमण और व्यावसायिक गतिविधियों का मुद्दा उठाया गया है। न्यायालय के निर्देश पर भू-प्रबंधन निरीक्षक, तहसीलदार गिर्वा, पटवारी और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में मौका निरीक्षण कराया जा रहा है। इसके लिए राजेश उपाध्याय को कमिश्नर नियुक्त किया गया है, जिन्हें सर्वे की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। यह सर्वे ददो से तीन तीन में पुरा होगा। वहीं मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष चंद्रप्रकाश दाधीच ने बताया कि मंदिर की भूमि को लेकर 1954 में सेटलमेंट कमिश्नर का आदेश पारित हुआ था, जिसे 1975 में राजस्व मंडल ने भी यथावत रखा। उनके अनुसार बाद में कुछ लोगों ने फर्जी पट्टों के जरिए भूमि पर कब्जे किए और वर्तमान में यह भूमि नए आराजी नंबर 42 के अंतर्गत दर्ज है। दाधीच ने बताया कि सर्वे में अतिक्रमण, व्यावसायिक गतिविधियों और कब्जे की स्थिति की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। उनके अनुसार फतेहसागर किनारे से लेकर रानी रोड तक का बड़ा क्षेत्र मंदिर की खातेदारी भूमि में दर्ज है। उन्होंने कई मकानों और होटलों के मंदिर भूमि पर होने का दावा भी किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश दाधीच के अनुसार महाकाल मंदिर भूमि पर कई तीन सितारा होटल आलिशान मकान सहित कई रेस्टोरेंट ने अपना अधिकार जता रखा है फिलहाल सर्वें पूरा होने और रिपोर्ट न्यायलय मे पेश होने के बाद ही पता चल सकेगा की उक्त मंदिर की भूमि पर कितने लोगो ने कब्जा किया हुआ है

18 Aug 2026